श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.1.38

दशम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

मृत्युर्जन्मवतां वीर देहेन सह जायते।

अद्य वाब्दशतान्ते वा मृत्युर्वै प्राणिनां ध्रुवः॥ ३८

mṛtyurjanmavatāṃ vīra dehena saha jāyate|

adya vābdaśatānte vā mṛtyurvai prāṇināṃ dhruvaḥ|| 38

अर्थ

वीरवर! जो जन्म लेते हैं, उनके शरीरके साथ ही मृत्यु भी उत्पन्‍न होती है। आज हो या सौ वर्षके बाद—जो प्राणी है, उसकी मृत्यु होगी ही॥ ३८॥

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