श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

दशम स्कन्ध (पूर्वार्ध)

49 अध्याय · 2013 श्लोक

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥

श्रीमद्भागवतमहापुराणम्

दशमः स्कन्धः
(पूर्वार्धः)

  1. 1अथ प्रथमोऽध्यायःभगवान्‌के द्वारा पृथ्वीको आश्‍वासन, वसुदेव-देवकीका विवाह और कंसके द्वारा देवकीके छः पुत्रोंकी हत्या69 श्लोक
    पृष्ठ 118
  2. 2अथ द्वितीयोऽध्यायःभगवान्‌का गर्भ-प्रवेश और देवताओंद्वारा गर्भ-स्तुति42 श्लोक
    पृष्ठ 128
  3. 3अथ तृतीयोऽध्यायःभगवान् श्रीकृष्णका प्राकट्य53 श्लोक
    पृष्ठ 134
  4. 4अथ चतुर्थोऽध्यायःकंसके हाथसे छूटकर योगमायाका आकाशमें जाकर भविष्यवाणी करना46 श्लोक
    पृष्ठ 145
  5. 5अथ पञ्चमोऽध्यायःगोकुलमें भगवान्‌का जन्ममहोत्सव32 श्लोक
    पृष्ठ 150
  6. 6अथ षष्ठोऽध्यायःपूतना-उद्धार44 श्लोक
    पृष्ठ 154
  7. 7अथ सप्तमोऽध्यायःशकट-भंजन और तृणावर्त-उद्धार37 श्लोक
    पृष्ठ 162
  8. 8अथाष्टमोऽध्यायःनामकरण-संस्कार और बाललीला52 श्लोक
    पृष्ठ 167
  9. 9अथ नवमोऽध्यायःश्रीकृष्णका ऊखलसे बाँधा जाना23 श्लोक
    पृष्ठ 180
  10. 10अथ दशमोऽध्यायःयमलार्जुनका उद्धार43 श्लोक
    पृष्ठ 189
  11. 11अथैकादशोऽध्यायःगोकुलसे वृन्दावन जाना तथा वत्सासुर और बकासुरका उद्धार59 श्लोक
    पृष्ठ 195
  12. 12अथ द्वादशोऽध्यायःअघासुरका उद्धार44 श्लोक
    पृष्ठ 203
  13. 13अथ त्रयोदशोऽध्यायःब्रह्माजीका मोह और उसका नाश64 श्लोक
    पृष्ठ 210
  14. 14अथ चतुर्दशोऽध्यायःब्रह्माजीके द्वारा भगवान्‌की स्तुति61 श्लोक
    पृष्ठ 220
  15. 15अथ पञ्चदशोऽध्यायःधेनुकासुरका उद्धार और ग्वालबालोंको कालियनागके विषसे बचाना52 श्लोक
    पृष्ठ 231
  16. 16अथ षोडशोऽध्यायःकालियपर कृपा67 श्लोक
    पृष्ठ 238
  17. 17अथ सप्तदशोऽध्यायःकालियके कालियदहमें आनेकी कथा तथा भगवान्‌का व्रजवासियोंको दावानलसे बचाना25 श्लोक
    पृष्ठ 248
  18. 18अथाष्टादशोऽध्यायःप्रलम्बासुर-उद्धार32 श्लोक
    पृष्ठ 252
  19. 19अथैकोनविंशोऽध्यायःगौओं और गोपोंको दावानलसे बचाना16 श्लोक
    पृष्ठ 256
  20. 20अथ विंशोऽध्यायःवर्षा और शरद्ऋतुका वर्णन49 श्लोक
    पृष्ठ 257
  21. 21अथैकविंशोऽध्यायःवेणुगीत20 श्लोक
    पृष्ठ 264
  22. 22अथ द्वाविंशोऽध्यायःचीरहरण38 श्लोक
    पृष्ठ 270
  23. 23अथ त्रयोविंशोऽध्यायःयज्ञपत्‍नियोंपर कृपा52 श्लोक
    पृष्ठ 281
  24. 24अथ चतुर्विंशोऽध्यायःइन्द्रयज्ञ-निवारण38 श्लोक
    पृष्ठ 289
  25. 25अथ पञ्चविंशोऽध्यायःगोवर्धनधारण33 श्लोक
    पृष्ठ 292
  26. 26अथ षड्विंशोऽध्यायःनन्दबाबासे गोपोंकी श्रीकृष्णके प्रभावके विषयमें बातचीत25 श्लोक
    पृष्ठ 297
  27. 27अथ सप्तविंशोऽध्यायःश्रीकृष्णका अभिषेक28 श्लोक
    पृष्ठ 301
  28. 28अथाष्टाविंशोऽध्यायःवरुणलोकसे नन्दजीको छुड़ाकर लाना17 श्लोक
    पृष्ठ 303
  29. 29अथैकोनत्रिंशोऽध्यायःरासलीलाका आरम्भ48 श्लोक
    पृष्ठ 307
  30. 30अथ त्रिंशोऽध्यायःश्रीकृष्णके विरहमें गोपियोंकी दशा45 श्लोक
    पृष्ठ 316
  31. 31अथैकत्रिंशोऽध्यायःगोपिकागीत19 श्लोक
    पृष्ठ 323
  32. 32अथ द्वात्रिंशोऽध्यायःभगवान्‌का प्रकट होकर गोपियोंको सान्त्वना देना22 श्लोक
    पृष्ठ 327
  33. 33अथ त्रयस्त्रिंशोऽध्यायःमहारास40 श्लोक
    पृष्ठ 331
  34. 34अथ चतुस्त्रिंशोऽध्यायःसुदर्शन और शंखचूडका उद्धार32 श्लोक
    पृष्ठ 347
  35. 35अथ पञ्चत्रिंशोऽध्यायःयुगलगीत26 श्लोक
    पृष्ठ 350
  36. 36अथ षट्त्रिंशोऽध्यायःअरिष्टासुरका उद्धार और कंसका श्रीअक्रूरजीको व्रजमें भेजना40 श्लोक
    पृष्ठ 356
  37. 37अथ सप्तत्रिंशोऽध्यायःकेशी और व्योमासुरका उद्धार तथा नारदजीके द्वारा भगवान्‌की स्तुति34 श्लोक
    पृष्ठ 361
  38. 38अथाष्टात्रिंशोऽध्यायःअक्रूरजीकी व्रजयात्रा43 श्लोक
    पृष्ठ 366
  39. 39अथैकोनचत्वारिंशोऽध्यायःश्रीकृष्ण-बलरामका मथुरागमन57 श्लोक
    पृष्ठ 373
  40. 40अथ चत्वारिंशोऽध्यायःअक्रूरजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी स्तुति30 श्लोक
    पृष्ठ 381
  41. 41अथैकचत्वारिंशोऽध्यायःश्रीकृष्णका मथुराजीमें प्रवेश52 श्लोक
    पृष्ठ 386
  42. 42अथ द्विचत्वारिंशोऽध्यायःकुब्जापर कृपा, धनुषभंग और कंसकी घबड़ाहट38 श्लोक
    पृष्ठ 392
  43. 43अथ त्रिचत्वारिंशोऽध्यायःकुवलयापीडका उद्धार और अखाड़ेमें प्रवेश40 श्लोक
    पृष्ठ 397
  44. 44अथ चतुश्‍चत्वारिंशोऽध्यायःचाणूर, मुष्टिक आदि पहलवानोंका तथा कंसका उद्धार51 श्लोक
    पृष्ठ 401
  45. 45अथ पञ्चचत्वारिंशोऽध्यायःश्रीकृष्ण-बलरामका यज्ञोपवीत और गुरुकुलप्रवेश50 श्लोक
    पृष्ठ 407
  46. 46अथ षट्चत्वारिंशोऽध्यायःउद्धवजीकी व्रजयात्रा49 श्लोक
    पृष्ठ 414
  47. 47अथ सप्तचत्वारिंशोऽध्यायःउद्धव तथा गोपियोंकी बातचीत और भ्रमरगीत69 श्लोक
    पृष्ठ 421
  48. 48अथाष्टचत्वारिंशोऽध्यायःभगवान्‌का कुब्जा और अक्रूरजीके घर जाना36 श्लोक
    पृष्ठ 434
  49. 49अथैकोनपञ्चाशत्तमोऽध्यायःअक्रूरजीका हस्तिनापुर जाना31 श्लोक
    पृष्ठ 439

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