सम्भव है, उलटा ही हो। मेरा लड़का ही इसे मार डाले! क्योंकि विधाताके विधानका पार पाना बहुत कठिन है । मृत्यु सामने आकर भी टल जाती है और टली हुई भी लौट आती है॥ ५०॥
विपर्ययो वा किं न स्याद् गतिर्धातुर्दुरत्यया।
उपस्थितो निवर्तेत निवृत्तः पुनरापतेत्॥ ५०
सम्भव है, उलटा ही हो। मेरा लड़का ही इसे मार डाले! क्योंकि विधाताके विधानका पार पाना बहुत कठिन है । मृत्यु सामने आकर भी टल जाती है और टली हुई भी लौट आती है॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 125) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/1/50/