भगवन्! आपने अभी बतलाया था कि बलरामजी रोहिणीके पुत्र थे। इसके बाद देवकीके पुत्रोंमें भी आपने उनकी गणना की। दूसरा शरीर धारण किये बिना दो माताओंका पुत्र होना कैसे सम्भव है?॥ ८॥
रोहिण्यास्तनयः प्रोक्तो रामः संकर्षणस्त्वया।
देवक्या गर्भसम्बन्धः कुतो देहान्तरं विना॥ ८
भगवन्! आपने अभी बतलाया था कि बलरामजी रोहिणीके पुत्र थे। इसके बाद देवकीके पुत्रोंमें भी आपने उनकी गणना की। दूसरा शरीर धारण किये बिना दो माताओंका पुत्र होना कैसे सम्भव है?॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.1.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 120) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/1/8/