॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.11.3
उलूखलं विकर्षन्तं दाम्ना बद्धं च बालकम्।
कस्येदं कुत आश्चर्यमुत्पात इति कातराः॥ ३
ulūkhalaṃ vikarṣantaṃ dāmnā baddhaṃ ca bālakam|
kasyedaṃ kuta āścaryamutpāta iti kātarāḥ|| 3
अर्थ
वहाँ पहुँचनेपर उन लोगोंने देखा कि दोनों अर्जुनके वृक्ष गिरे हुए हैं। यद्यपि वृक्ष गिरनेका कारण स्पष्ट था—वहीं उनके सामने ही रस्सीमें बँधा हुआ बालक ऊखल खींच रहा था, परन्तु वे समझ न सके। ‘यह किसका काम है, ऐसी आश्चर्यजनक दुर्घटना कैसे घट गयी?’—यह सोचकर वे कातर हो गये, उनकी बुद्धि भ्रमित हो गयी॥ २-३॥