tatra cakrurvrajāvāsaṃ śakaṭairardhacandravat|| 35
अर्थ
वृन्दावन बड़ा ही सुन्दर वन है। चाहे कोई भी ऋतु हो, वहाँ सुख-ही-सुख है। उसमें प्रवेश करके ग्वालोंने अपने छकड़ोंको अर्द्धचन्द्राकार मण्डल बाँधकर खड़ा कर दिया और अपने गोधनके रहनेयोग्य स्थान बना लिया॥ ३५॥
वृन्दावनं संप्रविश्य सर्वकालसुखावहम्।
तत्र चक्रुर्व्रजावासं शकटैरर्धचन्द्रवत्॥ ३५
वृन्दावन बड़ा ही सुन्दर वन है। चाहे कोई भी ऋतु हो, वहाँ सुख-ही-सुख है। उसमें प्रवेश करके ग्वालोंने अपने छकड़ोंको अर्द्धचन्द्राकार मण्डल बाँधकर खड़ा कर दिया और अपने गोधनके रहनेयोग्य स्थान बना लिया॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 200) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/11/35/