एक दिनकी बात है, श्याम और बलराम अपने प्रेमी सखा ग्वालबालोंके साथ यमुनातटपर बछड़े चरा रहे थे। उसी समय उन्हें मारनेकी नीयतसे एक दैत्य आया॥ ४१॥
कदाचिद् यमुनातीरे वत्सांश्चारयतोः स्वकैः।
वयस्यैः कृष्णबलयोर्जिघांसुर्दैत्य आगमत्॥ ४१
एक दिनकी बात है, श्याम और बलराम अपने प्रेमी सखा ग्वालबालोंके साथ यमुनातटपर बछड़े चरा रहे थे। उसी समय उन्हें मारनेकी नीयतसे एक दैत्य आया॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.11.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 200) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/11/41/