श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.5

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

न ते तदुक्तं जगृहुर्न घटेतेति तस्य तत्।

बालस्योत्पाटनं तर्वोः केचित् सन्दिग्धचेतसः॥ ५

na te taduktaṃ jagṛhurna ghaṭeteti tasya tat|

bālasyotpāṭanaṃ tarvoḥ kecit sandigdhacetasaḥ|| 5

अर्थ

परन्तु गोपोंने बालकोंकी बात नहीं मानी। वे कहने लगे—‘एक नन्हा-सा बच्चा इतने बड़े वृक्षोंको उखाड़ डाले, यह कभी सम्भव नहीं है।’ किसी-किसीके चित्तमें श्रीकृष्णकी पहलेकी लीलाओंका स्मरण करके सन्देह भी हो आया॥ ५॥

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