श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.11.7

दशम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

गोपीभिः स्तोभितोऽनृत्यद् भगवान् बालवत् क्‍वचित्।

उद्गायति क्वचिन्मुग्धस्तद्वशो दारुयन्त्रवत्॥ ७

gopībhiḥ stobhito'nṛtyad bhagavān bālavat kvacit|

udgāyati kvacinmugdhastadvaśo dāruyantravat|| 7

अर्थ

सर्वशक्तिमान् भगवान् कभी-कभी गोपियोंके फुसलानेसे साधारण बालकोंके समान नाचने लगते। कभी भोले-भाले अनजान बालककी तरह गाने लगते। वे उनके हाथकी कठपुतली—उनके सर्वथा अधीन हो गये॥ ७॥

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