बहुत-से ग्वालबाल तो नदीके कछारमें छपका खेल रहे हैं और उसमें फुदकते हुए मेढकोंके साथ स्वयं भी फुदक रहे हैं। कोई पानीमें अपनी परछाईं देखकर उसकी हँसी कर रहे हैं, तो दूसरे अपने शब्दकी प्रतिध्वनिको ही बुरा-भला कह रहे हैं॥ १०॥✎ 14141415
साकं भेकैर्विलंघन्तः सरित्प्रस्रवसम्प्लुताः।
विहसन्तः प्रतिच्छायाः शपन्तश्च प्रतिस्वनान्॥ १०
बहुत-से ग्वालबाल तो नदीके कछारमें छपका खेल रहे हैं और उसमें फुदकते हुए मेढकोंके साथ स्वयं भी फुदक रहे हैं। कोई पानीमें अपनी परछाईं देखकर उसकी हँसी कर रहे हैं, तो दूसरे अपने शब्दकी प्रतिध्वनिको ही बुरा-भला कह रहे हैं॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.12.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 204) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/12/10/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)