श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.12.21

दशम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

प्रतिस्पर्धेते सृक्किभ्यां सव्यासव्ये नगोदरे।

तुंगशृंगालयोऽप्येतास्तद्दंष्ट्राभिश्‍च पश्यत॥ २१

pratispardhete sṛkkibhyāṃ savyāsavye nagodare|

tuṃgaśṛṃgālayo'pyetāstaddaṃṣṭrābhiśca paśyata|| 21

अर्थ

तीसरे ग्वालबालने कहा—‘हाँ, सच तो है। देखो तो सही, क्या ये दायीं और बायीं ओरकी गिरि-कन्दराएँ अजगरके जबड़ोंकी होड़ नहीं करतीं? और ये ऊँची-ऊँची शिखर-पंक्तियाँ तो साफ-साफ इसकी दाढ़ें मालूम पड़ती हैं’॥ २१॥

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