श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

भारतैवं वत्सपेषु भुंजानेष्वच्युतात्मसु।

वत्सास्त्वन्तर्वने दूरं विविशुस्तृणलोभिताः॥ १२

bhārataivaṃ vatsapeṣu bhuṃjāneṣvacyutātmasu|

vatsāstvantarvane dūraṃ viviśustṛṇalobhitāḥ|| 12

अर्थ

भरतवंशशिरोमणे! इस प्रकार भोजन करते-करते ग्वालबाल भगवान्‌की इस रसमयी लीलामें तन्मय हो गये। उसी समय उनके बछड़े हरी-हरी घासके लालचसे घोर जंगलमें बड़ी दूर निकल गये॥ १२॥

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