जब एक वर्ष पूरा होनेमें पाँच-छः रातें शेष थीं, तब एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ बछड़ोंको चराते हुए वनमें गये॥ २८॥
एकदा चारयन् वत्सान् सरामो वनमाविशत्।
पंचषासु त्रियामासु हायनापूरणीष्वजः॥ २८
जब एक वर्ष पूरा होनेमें पाँच-छः रातें शेष थीं, तब एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ बछड़ोंको चराते हुए वनमें गये॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 214) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/13/28/