श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.13.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

एकदा चारयन् वत्सान् सरामो वनमाविशत्।

पंचषासु त्रियामासु हायनापूरणीष्वजः॥ २८

ekadā cārayan vatsān sarāmo vanamāviśat|

paṃcaṣāsu triyāmāsu hāyanāpūraṇīṣvajaḥ|| 28

अर्थ

जब एक वर्ष पूरा होनेमें पाँच-छः रातें शेष थीं, तब एक दिन भगवान् श्रीकृष्ण बलरामजीके साथ बछड़ोंको चराते हुए वनमें गये॥ २८॥

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