ग्वालबालोंने एक स्वरसे कहा—‘ठीक है, ठीक है!’ उन्होंने बछड़ोंको पानी पिलाकर हरी-हरी घासमें छोड़ दिया और अपने-अपने छीके खोल-खोलकर भगवान्के साथ बड़े आनन्दसे भोजन करने लगे॥ ७॥✎ 141714182067
तथेति पाययित्वार्भा वत्सानारुध्य शाद्वले।
मुक्त्वा शिक्यानि बुभुजुः समं भगवता मुदा॥ ७
ग्वालबालोंने एक स्वरसे कहा—‘ठीक है, ठीक है!’ उन्होंने बछड़ोंको पानी पिलाकर हरी-हरी घासमें छोड़ दिया और अपने-अपने छीके खोल-खोलकर भगवान्के साथ बड़े आनन्दसे भोजन करने लगे॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 211) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/13/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#1417 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके, → छीके,