कोई पुष्प तो कोई पत्ते और कोई-कोई पल्लव, अंकुर, फल, छीके, छाल एवं पत्थरोंके पात्र बनाकर भोजन करने लगे॥ ९॥✎ 141714182067
केचित् पुष्पैर्दलैः केचित् पल्लवैरंकुरैः फलैः।
शिग्भिस्त्वग्भिर्दृषद्भिश्च बुभुजुः कृतभाजनाः॥ ९
कोई पुष्प तो कोई पत्ते और कोई-कोई पल्लव, अंकुर, फल, छीके, छाल एवं पत्थरोंके पात्र बनाकर भोजन करने लगे॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.13.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 211) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/13/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
#1417 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): छींके, → छीके,