श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

मेघगम्भीरया वाचा नामभिर्दूरगान् पशून्।

क्वचिदाह्वयति प्रीत्या गोगोपालमनोज्ञया॥ १२

meghagambhīrayā vācā nāmabhirdūragān paśūn|

kvacidāhvayati prītyā gogopālamanojñayā|| 12

अर्थ

कभी मेघके समान गम्भीर वाणीसे दूर गये हुए पशुओंको उनका नाम ले-लेकर बड़े प्रेमसे पुकारते हैं। उनके कण्ठकी मधुर ध्वनि सुनकर गायों और ग्वालबालोंका चित्त भी अपने वशमें नहीं रहता॥ १२॥

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