श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.23

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

सोऽतिवीर्योऽसुरो राम हे कृष्ण खररूपधृक्।

आत्मतुल्यबलैरन्यैर्ज्ञातिभिर्बहुभिर्वृतः॥ २३

so'tivīryo'suro rāma he kṛṣṇa khararūpadhṛk|

ātmatulyabalairanyairjñātibhirbahubhirvṛtaḥ|| 23

अर्थ

बलरामजी और भैया श्रीकृष्ण! वह दैत्य गधेके रूपमें रहता है। वह स्वयं तो बड़ा बलवान् है ही, उसके साथी और भी बहुत-से उसीके समान बलवान् दैत्य उसी रूपमें रहते हैं॥ २३॥

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