श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.33

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

तेनाहतो महातालो वेपमानो बृहच्छिराः।

पार्श्‍वस्थं कम्पयन् भ‌ग्‍नः स चान्यं सोऽपि चापरम्॥ ३३

tenāhato mahātālo vepamāno bṛhacchirāḥ|

pārśvasthaṃ kampayan bhagnaḥ sa cānyaṃ so'pi cāparam|| 33

अर्थ

उसके गिरनेकी चोटसे वह महान् ताड़का वृक्ष—जिसका ऊपरी भाग बहुत विशाल था—स्वयं तो तड़तड़ाकर गिर ही पड़ा, सटे हुए दूसरे वृक्षको भी उसने तोड़ डाला। उसने तीसरेको, तीसरेने चौथेको—इस प्रकार एक-दूसरेको गिराते हुए बहुत-से तालवृक्ष गिर पड़े॥ ३३॥

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