श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.41

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

कृष्णः कमलपत्राक्षः पुण्यश्रवणकीर्तनः।

स्तूयमानोऽनुगैर्गोपैः साग्रजो व्रजमाव्रजत्॥ ४१

kṛṣṇaḥ kamalapatrākṣaḥ puṇyaśravaṇakīrtanaḥ|

stūyamāno'nugairgopaiḥ sāgrajo vrajamāvrajat|| 41

अर्थ

इसके बाद कमलदललोचन भगवान् श्रीकृष्ण बड़े भाई बलरामजीके साथ व्रजमें आये। उस समय उनके साथी ग्वालबाल उनके पीछे-पीछे चलते हुए उनकी स्तुति करते जाते थे। क्यों न हो; भगवान्‌की लीलाओंका श्रवण-कीर्तन ही सबसे बढ़कर पवित्र जो है॥ ४१॥

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