श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.15.45

दशम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

गताध्वानश्रमौ तत्र मज्जनोन्मर्दनादिभिः।

नीवीं वसित्वा रुचिरां दिव्यस्रग्गन्धमण्डितौ॥ ४५

gatādhvānaśramau tatra majjanonmardanādibhiḥ|

nīvīṃ vasitvā rucirāṃ divyasraggandhamaṇḍitau|| 45

अर्थ

माताओंने तेल-उबटन आदि लगाकर स्नान कराया। इससे उनकी दिनभर घूमने-फिरनेकी मार्गकी थकान दूर हो गयी। फिर उन्होंने सुन्दर वस्त्र पहनाकर दिव्य पुष्पोंकी माला पहनायी तथा चन्दन लगाया॥ ४५॥

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