sa vai bahuyugāvāsaṃ yathā''sīd vipra kathyatām|| 2
अर्थ
राजा परीक्षित्ने पूछा—ब्रह्मन्! भगवान् श्रीकृष्णने यमुनाजीके अगाध जलमें किस प्रकार उस सर्पका दमन किया? फिर कालिय नाग तो जलचर जीव नहीं था, ऐसी दशामें वह अनेक युगोंतक जलमें क्यों और कैसे रहा? सो बतलाइये॥ २॥
कथमन्तर्जलेऽगाधे न्यगृह्णाद् भगवानहिम्।
स वै बहुयुगावासं यथाऽऽसीद् विप्र कथ्यताम्॥ २
राजा परीक्षित्ने पूछा—ब्रह्मन्! भगवान् श्रीकृष्णने यमुनाजीके अगाध जलमें किस प्रकार उस सर्पका दमन किया? फिर कालिय नाग तो जलचर जीव नहीं था, ऐसी दशामें वह अनेक युगोंतक जलमें क्यों और कैसे रहा? सो बतलाइये॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.16.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 238) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/16/2/