श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.16.44

दशम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

नमः प्रमाणमूलाय कवये शास्त्रयोनये।

प्रवृत्ताय निवृत्ताय निगमाय नमो नमः॥ ४४

namaḥ pramāṇamūlāya kavaye śāstrayonaye|

pravṛttāya nivṛttāya nigamāya namo namaḥ|| 44

अर्थ

प्रत्यक्ष-अनुमान आदि जितने भी प्रमाण हैं, उनको प्रमाणित करनेवाले मूल आप ही हैं। समस्त शास्त्र आपसे ही निकले हैं और आपका ज्ञान स्वतःसिद्ध है। आप ही मनको लगानेकी विधिके रूपमें और उसको सब कहींसे हटा लेनेकी आज्ञाके रूपमें प्रवृत्तिमार्ग और निवृत्तिमार्ग हैं। इन दोनोंके मूल वेद भी स्वयं आप ही हैं। हम आपको बार-बार नमस्कार करती हैं॥ ४४॥

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