श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.16.59

दशम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

भवान् हि कारणं तत्र सर्वज्ञो जगदीश्‍वरः।

अनुग्रहं निग्रहं वा मन्यसे तद् विधेहि नः॥ ५९

bhavān hi kāraṇaṃ tatra sarvajño jagadīśvaraḥ|

anugrahaṃ nigrahaṃ vā manyase tad vidhehi naḥ|| 59

अर्थ

आप सर्वज्ञ और सम्पूर्ण जगत‍्के स्वामी हैं। आप ही हमारे स्वभाव और इस मायाके कारण हैं। अब आप अपनी इच्छासे—जैसा ठीक समझें—कृपा कीजिये या दण्ड दीजिये॥ ५९॥

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