श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.17.13

दशम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

कृष्णं ह्रदाद् विनिष्क्रान्तं दिव्यस्रग्गन्धवाससम्।✎ 1148

महामणिगणाकीर्णं जाम्बूनदपरिष्कृतम्॥ १३

kṛṣṇaṃ hradād viniṣkrāntaṃ divyasraggandhavāsasam|

mahāmaṇigaṇākīrṇaṃ jāmbūnadapariṣkṛtam|| 13

अर्थ

परीक्षित्! इधर भगवान् श्रीकृष्ण दिव्य माला, गन्ध, वस्त्र, महामूल्य मणि और सुवर्णमय आभूषणोंसे विभूषित हो उस कुण्डसे बाहर निकले॥ १३॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1148 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): हृदाद् → ह्रदाद्

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