श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.17.18

दशम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

देहि दानं द्विजातीनां कृष्णनिर्मुक्तिहेतवे।

नन्दः प्रीतमना राजन् गाः सुवर्णं तदादिशत्॥ १८

dehi dānaṃ dvijātīnāṃ kṛṣṇanirmuktihetave|

nandaḥ prītamanā rājan gāḥ suvarṇaṃ tadādiśat|| 18

अर्थ

श्रीकृष्णके मृत्युके मुखसे लौट आनेके उपलक्ष्यमें तुम ब्राह्मणोंको दान करो।’ परीक्षित्! ब्राह्मणोंकी बात सुनकर नन्दबाबाको बड़ी प्रसन्‍नता हुई। उन्होंने बहुत-सा सोना और गौएँ ब्राह्मणोंको दान दीं॥ १८॥

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