श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.17.22

दशम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

तत उत्थाय सम्भ्रान्ता दह्यमाना व्रजौकसः।

कृष्णं ययुस्ते शरणं मायामनुजमीश्‍वरम्॥ २२

tata utthāya sambhrāntā dahyamānā vrajaukasaḥ|

kṛṣṇaṃ yayuste śaraṇaṃ māyāmanujamīśvaram|| 22

अर्थ

आगकी आँच लगनेपर व्रजवासी घबड़ाकर उठ खड़े हुए और लीला-मनुष्य भगवान् श्रीकृष्णकी शरणमें गये॥ २२॥

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