॥ श्रीहरिः ॥
तत उत्थाय सम्भ्रान्ता दह्यमाना व्रजौकसः।
कृष्णं ययुस्ते शरणं मायामनुजमीश्वरम्॥ २२
tata utthāya sambhrāntā dahyamānā vrajaukasaḥ|
kṛṣṇaṃ yayuste śaraṇaṃ māyāmanujamīśvaram|| 22
अर्थ
आगकी आँच लगनेपर व्रजवासी घबड़ाकर उठ खड़े हुए और लीला-मनुष्य भगवान् श्रीकृष्णकी शरणमें गये॥ २२॥
तत उत्थाय सम्भ्रान्ता दह्यमाना व्रजौकसः।
कृष्णं ययुस्ते शरणं मायामनुजमीश्वरम्॥ २२
आगकी आँच लगनेपर व्रजवासी घबड़ाकर उठ खड़े हुए और लीला-मनुष्य भगवान् श्रीकृष्णकी शरणमें गये॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.17.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 251) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/17/22/