श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ग्वालबालोंने घर पहुँचकर अपनी मा, बहिन आदि स्त्रियोंसे श्रीकृष्ण और बलरामने जो कुछ अद्भुत कर्म किये थे—दावानलसे उनको बचाना, प्रलम्बको मारना इत्यादि—सबका वर्णन किया॥ १॥✎ 1424
तयोस्तदद्भुतं कर्म दावाग्नेर्मोक्षमात्मनः।
गोपाः स्त्रीभ्यः समाचख्युः प्रलम्बवधमेव च॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! ग्वालबालोंने घर पहुँचकर अपनी मा, बहिन आदि स्त्रियोंसे श्रीकृष्ण और बलरामने जो कुछ अद्भुत कर्म किये थे—दावानलसे उनको बचाना, प्रलम्बको मारना इत्यादि—सबका वर्णन किया॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.20.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 258) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/20/1/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)