श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.20.25

दशम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

एवं वनं तद् वर्षिष्ठं पक्वखर्जूरजम्बुमत्।

गोगोपालैर्वृतो रन्तुं सबलः प्राविशद्धरिः॥ २५

evaṃ vanaṃ tad varṣiṣṭhaṃ pakvakharjūrajambumat|

gogopālairvṛto rantuṃ sabalaḥ prāviśaddhariḥ|| 25

अर्थ

वर्षा ऋतुमें वृन्दावन इसी प्रकार शोभायमान और पके हुए खजूर तथा जामुनोंसे भर रहा था। उसी वनमें विहार करनेके लिये श्याम और बलरामने ग्वालबाल और गौओंके साथ प्रवेश किया॥ २५॥

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