dehi vāsāṃsi dharmajña no ced rājñe bruvāmahe|| 15
अर्थ
प्यारे श्यामसुन्दर! हम तुम्हारी दासी हैं। तुम जो कुछ कहोगे, उसे हम करनेको तैयार हैं। तुम तो धर्मका मर्म भलीभाँति जानते हो। हमें कष्ट मत दो। हमारे वस्त्र हमें दे दो; नहीं तो हम जाकर नन्दबाबासे कह देंगी’॥ १५॥✎ 1981
श्यामसुन्दर ते दास्यः करवाम तवोदितम्।
देहि वासांसि धर्मज्ञ नो चेद् राज्ञे ब्रुवामहे॥ १५
प्यारे श्यामसुन्दर! हम तुम्हारी दासी हैं। तुम जो कुछ कहोगे, उसे हम करनेको तैयार हैं। तुम तो धर्मका मर्म भलीभाँति जानते हो। हमें कष्ट मत दो। हमारे वस्त्र हमें दे दो; नहीं तो हम जाकर नन्दबाबासे कह देंगी’॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.22.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 272) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/22/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1981 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): ठंढे → ठंडे