श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.12

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

न ते यदोमिति प्रोचुर्न नेति च परंतप।

गोपा निराशाः प्रत्येत्य तथोचुः कृष्णरामयोः॥ १२

na te yadomiti procurna neti ca paraṃtapa|

gopā nirāśāḥ pratyetya tathocuḥ kṛṣṇarāmayoḥ|| 12

अर्थ

परीक्षित्! जब उन ब्राह्मणोंने ‘हाँ’ या ‘ना’—कुछ नहीं कहा, तब ग्वालबालोंकी आशा टूट गयी; वे लौट आये और वहाँकी सब बात उन्होंने श्रीकृष्ण तथा बलरामसे कह दी॥ १२॥

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