‘मेरे प्यारे ग्वालबालो! इस बार तुमलोग उनकी पत्नियोंके पास जाओ और उनसे कहो कि राम और श्याम यहाँ आये हैं। तुम जितना चाहोगे उतना भोजन वे तुम्हें देंगी। वे मुझसे बड़ा प्रेम करती हैं। उनका मन सदा-सर्वदा मुझमें लगा रहता है’॥ १४॥
मां ज्ञापयत पत्नीभ्यः ससंकर्षणमागतम्।
दास्यन्ति काममन्नं वः स्निग्धा मय्युषिता धिया॥ १४
‘मेरे प्यारे ग्वालबालो! इस बार तुमलोग उनकी पत्नियोंके पास जाओ और उनसे कहो कि राम और श्याम यहाँ आये हैं। तुम जितना चाहोगे उतना भोजन वे तुम्हें देंगी। वे मुझसे बड़ा प्रेम करती हैं। उनका मन सदा-सर्वदा मुझमें लगा रहता है’॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 283) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/23/14/