श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.17

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

गाश्‍चारयन् सगोपालैः सरामो दूरमागतः।

बुभुक्षितस्य तस्यान्‍नं सानुगस्य प्रदीयताम्॥ १७

gāścārayan sagopālaiḥ sarāmo dūramāgataḥ|

bubhukṣitasya tasyānnaṃ sānugasya pradīyatām|| 17

अर्थ

वे ग्वालबाल और बलरामजीके साथ गौएँ चराते हुए इधर बहुत दूर आ गये हैं। इस समय उन्हें और उनके साथियोंको भूख लगी है। आप उनके लिये कुछ भोजन दे दें’॥ १७॥

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