वे ग्वालबाल और बलरामजीके साथ गौएँ चराते हुए इधर बहुत दूर आ गये हैं। इस समय उन्हें और उनके साथियोंको भूख लगी है। आप उनके लिये कुछ भोजन दे दें’॥ १७॥
गाश्चारयन् सगोपालैः सरामो दूरमागतः।
बुभुक्षितस्य तस्यान्नं सानुगस्य प्रदीयताम्॥ १७
वे ग्वालबाल और बलरामजीके साथ गौएँ चराते हुए इधर बहुत दूर आ गये हैं। इस समय उन्हें और उनके साथियोंको भूख लगी है। आप उनके लिये कुछ भोजन दे दें’॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.23.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 283) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/23/17/