श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

प्राणबुद्धिमनःस्वात्मदारापत्यधनादयः।

यत्सम्पर्कात् प्रिया आसंस्ततः को न्वपरः प्रियः॥ २७

prāṇabuddhimanaḥsvātmadārāpatyadhanādayaḥ|

yatsamparkāt priyā āsaṃstataḥ ko nvaparaḥ priyaḥ|| 27

अर्थ

प्राण, बुद्धि, मन, शरीर, स्वजन, स्त्री, पुत्र और धन आदि संसारकी सभी वस्तुएँ जिसके लिये और जिसकी सन्‍निधिसे प्रिय लगती हैं—उस आत्मासे, परमात्मासे, मुझ श्रीकृष्णसे बढ़कर और कौन प्यारा हो सकता है॥ २७॥

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