श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.23.8

दशम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

दीक्षायाः पशुसंस्थायाः सौत्रामण्याश्‍च सत्तमाः।

अन्यत्र दीक्षितस्यापि नान्‍नमश्‍नन् हि दुष्यति॥ ८

dīkṣāyāḥ paśusaṃsthāyāḥ sautrāmaṇyāśca sattamāḥ|

anyatra dīkṣitasyāpi nānnamaśnan hi duṣyati|| 8

अर्थ

सज्जनो! जिस यज्ञदीक्षामें पशुबलि होती है, उसमें और सौत्रामणी यज्ञमें दीक्षित पुरुषका अन्‍न नहीं खाना चाहिये। इनके अतिरिक्त और किसी भी समय किसी भी यज्ञमें दीक्षित पुरुषका भी अन्‍न खानेमें कोई दोष नहीं है॥ ८॥

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