श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.20

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

वर्तेत ब्रह्मणा विप्रो राजन्यो रक्षया भुवः।

वैश्यस्तु वार्तया जीवेच्छूद्रस्तु द्विजसेवया॥ २०

varteta brahmaṇā vipro rājanyo rakṣayā bhuvaḥ|

vaiśyastu vārtayā jīvecchūdrastu dvijasevayā|| 20

अर्थ

ब्राह्मण वेदोंके अध्ययन-अध्यापनसे, क्षत्रिय पृथ्वीपालनसे, वैश्य वार्तावृत्तिसे और शूद्र ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्योंकी सेवासे अपनी जीविकाका निर्वाह करें॥ २०॥

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