श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.24.34

दशम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

अनांस्यनडुद्युक्तानि ते चारुह्य स्वलंकृताः।

गोप्यश्‍च कृष्णवीर्याणि गायन्त्यः सद्विजाशिषः॥ ३४

anāṃsyanaḍudyuktāni te cāruhya svalaṃkṛtāḥ|

gopyaśca kṛṣṇavīryāṇi gāyantyaḥ sadvijāśiṣaḥ|| 34

अर्थ

ब्राह्मणोंका आशीर्वाद प्राप्त करके वे और गोपियाँ भलीभाँति शृंगार करके और बैलोंसे जुती गाड़ियोंपर सवार होकर भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाओंका गान करती हुई गिरिराजकी परिक्रमा करने लगीं॥ ३४॥✎ 2080

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2080 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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