ब्राह्मणोंका आशीर्वाद प्राप्त करके वे और गोपियाँ भलीभाँति शृंगार करके और बैलोंसे जुती गाड़ियोंपर सवार होकर भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाओंका गान करती हुई गिरिराजकी परिक्रमा करने लगीं॥ ३४॥✎ 2080
अनांस्यनडुद्युक्तानि ते चारुह्य स्वलंकृताः।
गोप्यश्च कृष्णवीर्याणि गायन्त्यः सद्विजाशिषः॥ ३४
ब्राह्मणोंका आशीर्वाद प्राप्त करके वे और गोपियाँ भलीभाँति शृंगार करके और बैलोंसे जुती गाड़ियोंपर सवार होकर भगवान् श्रीकृष्णकी लीलाओंका गान करती हुई गिरिराजकी परिक्रमा करने लगीं॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.24.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 293) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/24/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)