इस प्रकार मूसलधार वर्षा तथा झंझावातके झपाटेसे जब एक-एक पशु ठिठुरने और काँपने लगा, ग्वाल और ग्वालिनें भी ठंडके मारे अत्यन्त व्याकुल हो गयीं, तब वे सब-के-सब भगवान् श्रीकृष्णकी शरणमें आये॥ ११॥✎ 20812082
अत्यासारातिवातेन पशवो जातवेपनाः।
गोपा गोप्यश्च शीतार्ता गोविन्दं शरणं ययुः॥ ११
इस प्रकार मूसलधार वर्षा तथा झंझावातके झपाटेसे जब एक-एक पशु ठिठुरने और काँपने लगा, ग्वाल और ग्वालिनें भी ठंडके मारे अत्यन्त व्याकुल हो गयीं, तब वे सब-के-सब भगवान् श्रीकृष्णकी शरणमें आये॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 294) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/25/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)