श्रीकृष्णकी योगमायाका यह प्रभाव देखकर इन्द्रके आश्चर्यका ठिकाना न रहा। अपना संकल्प पूरा न होनेके कारण उनकी सारी हेकड़ी बंद हो गयी, वे भौंचक्के-से रह गये। इसके बाद उन्होंने मेघोंको अपने-आप वर्षा करनेसे रोक दिया॥ २४॥✎ 885
कृष्णयोगानुभावं तं निशाम्येन्द्रोऽतिविस्मितः।
निःस्तम्भो भ्रष्टसंकल्पः स्वान् मेघान् संन्यवारयत्॥ २४
श्रीकृष्णकी योगमायाका यह प्रभाव देखकर इन्द्रके आश्चर्यका ठिकाना न रहा। अपना संकल्प पूरा न होनेके कारण उनकी सारी हेकड़ी बंद हो गयी, वे भौंचक्के-से रह गये। इसके बाद उन्होंने मेघोंको अपने-आप वर्षा करनेसे रोक दिया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 296) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/25/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)