श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.25.27

दशम स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

ततस्ते निर्ययुर्गोपाः स्वं स्वमादाय गोधनम्।

शकटोढोपकरणं स्त्रीबालस्थविराः शनैः॥ २७

tataste niryayurgopāḥ svaṃ svamādāya godhanam|

śakaṭoḍhopakaraṇaṃ strībālasthavirāḥ śanaiḥ|| 27

अर्थ

भगवान्‌की ऐसी आज्ञा पाकर अपने-अपने गोधन, स्त्रियों, बच्चों और बूढ़ोंको साथ ले तथा अपनी सामग्री छकड़ोंपर लादकर धीरे-धीरे सब लोग बाहर निकल आये॥ २७॥✎ 885

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #885 शब्दोंके बीचका स्थान: रहगये। → रह गये।

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