भगवान्की ऐसी आज्ञा पाकर अपने-अपने गोधन, स्त्रियों, बच्चों और बूढ़ोंको साथ ले तथा अपनी सामग्री छकड़ोंपर लादकर धीरे-धीरे सब लोग बाहर निकल आये॥ २७॥✎ 885
ततस्ते निर्ययुर्गोपाः स्वं स्वमादाय गोधनम्।
शकटोढोपकरणं स्त्रीबालस्थविराः शनैः॥ २७
भगवान्की ऐसी आज्ञा पाकर अपने-अपने गोधन, स्त्रियों, बच्चों और बूढ़ोंको साथ ले तथा अपनी सामग्री छकड़ोंपर लादकर धीरे-धीरे सब लोग बाहर निकल आये॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 296) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/25/27/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)