॥ श्रीहरिः ॥
यशोदा रोहिणी नन्दो रामश्च बलिनां वरः।
कृष्णमालिङ्ग्य युयुजुराशिषः स्नेहकातराः॥ ३०
yaśodā rohiṇī nando rāmaśca balināṃ varaḥ|
kṛṣṇamāliṅgya yuyujurāśiṣaḥ snehakātarāḥ|| 30
अर्थ
यशोदारानी, रोहिणीजी, नन्दबाबा और बलवानोंमें श्रेष्ठ बलरामजीने स्नेहातुर होकर श्रीकृष्णको हृदयसे लगा लिया तथा आशीर्वाद दिये॥ ३०॥
यशोदा रोहिणी नन्दो रामश्च बलिनां वरः।
कृष्णमालिङ्ग्य युयुजुराशिषः स्नेहकातराः॥ ३०
यशोदारानी, रोहिणीजी, नन्दबाबा और बलवानोंमें श्रेष्ठ बलरामजीने स्नेहातुर होकर श्रीकृष्णको हृदयसे लगा लिया तथा आशीर्वाद दिये॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 297) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/30/