॥ श्रीहरिः ॥
शंखदुन्दुभयो नेदुर्दिवि देवप्रणोदिताः।
जगुर्गन्धर्वपतयस्तुम्बुरुप्रमुखा नृप॥ ३२
śaṃkhadundubhayo nedurdivi devapraṇoditāḥ|
jagurgandharvapatayastumburupramukhā nṛpa|| 32
अर्थ
राजन्! स्वर्गमें देवतालोग शंख और नौबत बजाने लगे। तुम्बुरु आदि गन्धर्वराज भगवान्की मधुर लीलाका गान करने लगे॥ ३२॥
शंखदुन्दुभयो नेदुर्दिवि देवप्रणोदिताः।
जगुर्गन्धर्वपतयस्तुम्बुरुप्रमुखा नृप॥ ३२
राजन्! स्वर्गमें देवतालोग शंख और नौबत बजाने लगे। तुम्बुरु आदि गन्धर्वराज भगवान्की मधुर लीलाका गान करने लगे॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 297) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/32/