एक तो ये यों ही धनके नशेमें चूर हो रहे थे; दूसरे कृष्णने इनको और बढ़ावा दे दिया है। अब तुमलोग जाकर इनके इस धनके घमण्ड और हेकड़ीको धूलमें मिला दो तथा उनके पशुओंका संहार कर डालो॥ ६॥
एषां श्रियावलिप्तानां कृष्णेनाध्मायितात्मनाम्।
धुनुत श्रीमदस्तम्भं पशून् नयत संक्षयम्॥ ६
एक तो ये यों ही धनके नशेमें चूर हो रहे थे; दूसरे कृष्णने इनको और बढ़ावा दे दिया है। अब तुमलोग जाकर इनके इस धनके घमण्ड और हेकड़ीको धूलमें मिला दो तथा उनके पशुओंका संहार कर डालो॥ ६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.25.6 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 294) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/25/6/