नन्दबाबाने कहा—गोपो! तुमलोग सावधान होकर मेरी बात सुनो। मेरे बालकके विषयमें तुम्हारी शंका दूर हो जाय। क्योंकि महर्षि गर्गने इस बालकको देखकर इसके विषयमें ऐसा ही कहा था॥ १५॥
श्रूयतां मे वचो गोपा व्येतु शंका च वोऽर्भके।
एनं कुमारमुद्दिश्य गर्गो मे यदुवाच ह॥ १५
नन्दबाबाने कहा—गोपो! तुमलोग सावधान होकर मेरी बात सुनो। मेरे बालकके विषयमें तुम्हारी शंका दूर हो जाय। क्योंकि महर्षि गर्गने इस बालकको देखकर इसके विषयमें ऐसा ही कहा था॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.26.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 299) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/10/26/15/