॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.26.22
तस्मान्नन्द कुमारोऽयं नारायणसमो गुणैः।
श्रिया कीर्त्यानुभावेन तत्कर्मसु न विस्मयः॥ २२
tasmānnanda kumāro'yaṃ nārāyaṇasamo guṇaiḥ|
śriyā kīrtyānubhāvena tatkarmasu na vismayaḥ|| 22
अर्थ
नन्दजी! चाहे जिस दृष्टिसे देखें—गुणसे, ऐश्वर्य और सौन्दर्यसे, कीर्ति और प्रभावसे तुम्हारा बालक स्वयं भगवान् नारायणके ही समान है, अतः इस बालकके अलौकिक कार्योंको देखकर आश्चर्य न करना चाहिये’॥ २२॥