जब यह ग्वालबाल और बलरामजीके साथ बछड़ोंको चरानेके लिये वनमें गया हुआ था उस समय इसको मार डालनेके लिये एक दैत्य बगुलेके रूपमें आया और इसने दोनों हाथोंसे उसके दोनों ठोर पकड़कर उसे तिनकेकी तरह चीर डाला॥ ८॥
वने संचारयन् वत्सान् सरामो बालकैर्वृतः।
हन्तुकामं बकं दोर्भ्यां मुखतोऽरिमपाटयत्॥ ८
जब यह ग्वालबाल और बलरामजीके साथ बछड़ोंको चरानेके लिये वनमें गया हुआ था उस समय इसको मार डालनेके लिये एक दैत्य बगुलेके रूपमें आया और इसने दोनों हाथोंसे उसके दोनों ठोर पकड़कर उसे तिनकेकी तरह चीर डाला॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 10.26.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 298) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/10/26/8/