॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.27.16
मामैश्वर्यश्रीमदान्धो दण्डपाणिं न पश्यति।
तं भ्रंशयामि सम्पद्भ्यो यस्य चेच्छाम्यनुग्रहम्॥ १६
māmaiśvaryaśrīmadāndho daṇḍapāṇiṃ na paśyati|
taṃ bhraṃśayāmi sampadbhyo yasya cecchāmyanugraham|| 16
अर्थ
जो ऐश्वर्य और धन-सम्पत्तिके मदसे अंधा हो जाता है, वह यह नहीं देखता कि मैं कालरूप परमेश्वर हाथमें दण्ड लेकर उसके सिरपर सवार हूँ। मैं जिसपर अनुग्रह करना चाहता हूँ, उसे ऐश्वर्यभ्रष्ट कर देता हूँ॥ १६॥