श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.27.28

दशम स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

इति गोगोकुलपतिं गोविन्दमभिषिच्य सः।

अनुज्ञातो ययौ शक्रो वृतो देवादिभिर्दिवम्॥ २८

iti gogokulapatiṃ govindamabhiṣicya saḥ|

anujñāto yayau śakro vṛto devādibhirdivam|| 28

अर्थ

इन्द्रने इस प्रकार गौ और गोकुलके स्वामी श्रीगोविन्दका अभिषेक किया और उनसे अनुमति प्राप्त होनेपर देवता, गन्धर्व आदिके साथ स्वर्गकी यात्रा की॥ २८॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे पूर्वार्धे
इन्द्रस्तुतिर्नाम सप्तविंशोऽध्यायः
॥ २७॥

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