॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.27.9
तवावतारोऽयमधोक्षजेह
स्वयम्भराणामुरुभारजन्मनाम् ।
चमूपतीनामभवाय देव
भवाय युष्मच्चरणानुवर्तिनाम्॥ ९
tavāvatāro'yamadhokṣajeha
svayambharāṇāmurubhārajanmanām |
camūpatīnāmabhavāya deva
bhavāya yuṣmaccaraṇānuvartinām|| 9
अर्थ
स्वयंप्रकाश, इन्द्रियातीत परमात्मन्! आपका यह अवतार इसलिये हुआ है कि जो असुर-सेनापति केवल अपना पेट पालनेमें ही लग रहे हैं और पृथ्वीके लिये बड़े भारी भारके कारण बन रहे हैं, उनका वध करके उन्हें मोक्ष दिया जाय और जो आपके चरणोंके सेवक हैं—आज्ञाकारी भक्तजन हैं, उनका अभ्युदय हो—उनकी रक्षा हो॥ ९॥