श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 10.28.14

दशम स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

इति संचिन्त्य भगवान् महाकारुणिको हरिः।

दर्शयामास लोकं स्वं गोपानां तमसः परम्॥ १४

iti saṃcintya bhagavān mahākāruṇiko hariḥ|

darśayāmāsa lokaṃ svaṃ gopānāṃ tamasaḥ param|| 14

अर्थ

परमदयालु भगवान् श्रीकृष्णने इस प्रकार सोचकर उन गोपोंको मायान्धकारसे अतीत अपना परमधाम दिखलाया॥ १४॥

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