॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 10.29.47
एवं भगवतः कृष्णाल्लब्धमाना महात्मनः।
आत्मानं मेनिरे स्त्रीणां मानिन्योऽभ्यधिकं भुवि॥ ४७
evaṃ bhagavataḥ kṛṣṇāllabdhamānā mahātmanaḥ|
ātmānaṃ menire strīṇāṃ māninyo'bhyadhikaṃ bhuvi|| 47
अर्थ
उदारशिरोमणि सर्वव्यापक भगवान् श्रीकृष्णने जब इस प्रकार गोपियोंका सम्मान किया, तब गोपियोंके मनमें ऐसा भाव आया कि संसारकी समस्त स्त्रियोंमें हम ही सर्वश्रेष्ठ हैं, हमारे समान और कोई नहीं है। वे कुछ मानवती हो गयीं॥ ४७॥